40 हजार में बनाया किडनी का वॉल्व, प्राइवेट में एक लाख खर्च

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जबलपुर, राजीव उपाध्याय। प्राइवेट अस्पतालों में नया वॉल्व बदलने का खर्च एक से डेढ़ लाख रुपए है लेकिन मेडिकल अस्पताल जबलपुर में मात्र 40 हजार रुपए के इंजेक्शन में नया वॉल्व बनाया जा रहा है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में से सिर्फ जबलपुर में मेडिकल अस्पताल में शिशु शल्य चिकित्सा विभाग के एक्सपर्ट सर्जन ही इसका उपयोग कर रहे हैं। खास बात यह है कि इंजेक्शन का ईजाद आयरलैंड में प्रेक्टिस कर रहे डा. प्रेम पुरी ने किया है जिन्होंने करीब 35 साल पहले मेडिकल कॉलेज जबलपुर से ही एमबीबीएस किया।

दमोह के चार वर्षीय मनोज पटेल (परिवर्तित नाम) को यूरिन में समस्या होने पर परिजन ने इसकी जांच मेडिकल अस्पताल के शिशु शल्य चिकित्सा विभाग में कराई। इसमें पता चला कि उसकी एक ही किडनी है और उसका पेशाब की नली से जोड़ने वाला वॉल्व बंद है। वॉल्व बंद होने से यूरिन वापस किडनी में जा रही थी। संक्रमण से किडनी फेल भी हो सकती थी। मेडिकल अस्पताल में मंगलवार को शिशु शल्य चिकित्सा विभाग में एंडोपीडिया राष्ट्रीय फेलोशिप कार्यक्रम में अनोखा आपरेशन हुआ।

इसमें रिफ्लक्स बीमारी से पीड़ित बच्चे को डीफ्लक्स इंजेक्शन दूरबीन में नीडिल लगाकर डाला गया। इस इंजेक्शन से 20 मिनट में नया वॉल्व बन गया। इससे यूरिन का वापस किडनी में जाना बंद हो गया। मेडिकल कॉलेज जबलपुर में प्रोफेसर डॉ. विकेश अग्रवाल ने मिशिगन अमेरिका में पीड्रियाट्रिक यूरोलॉजी की स्कालरशिप की और इस तरह के ऑपरेशन जबलपुर में शुरू किए हैं।

कितना खर्च

– इंजेक्शन की कीमत- 40,000 रुपए

– निजी एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में दूरबीन से वॉल्ब बनाने का खर्च- एक से डेढ़ लाख रुपए

– मेडिकल अस्पताल जबलपुर में खर्च- बीपीएल मरीजों का नि:शुल्क, शासन से राज्य बीमारी सहायता निधि से मदद।

इन अस्पतालों में सुविधा

– एम्स हॉस्पिटल देहली, पीजीआई चंडीगढ़ व अन्य महानगरों के प्रायवेट हॉस्पिटल।

– प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में केवल मेडिकल कॉलेज जबलपुर।

20 सर्जन्स को सिखाई सर्जरी

जबलपुर के प्रोफेसर डॉ. विकेश अग्रवाल, मुंबई के डॉ.केतन पारेख, एसजी पीजीआई लखनऊ के डॉ. एमएस अंसारी ने फेलोशिप प्रोगाम के तहत मेडिकल कॉलेज जबलपुर में दूरबीन से बच्चों में यूरोलॉजी की सर्जरी देशभर से आए 20 सर्जंस को सिखाई और आपरेशन किए।

इंजेक्शन से वॉल्व बनाने की यह सर्जरी प्रदेश के मेडिकल अस्पतालों में केवल जबलपुर में ही किए जा रहे हैं। सिर्फ 20 मिनट में वॉल्ब बन जाता है और मरीज को शाम को छुट्टी देदी जाती है। जबकि परंरागत आपरेशन में चीड़-फाड़ की जाती है। – डॉ. विकेश अग्रवाल, प्रोफेसर, शिशु शल्य चिकित्सा विभाग, मेडिकल कॉलेज जबलपुर

Courtesy: नईदुनिया

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